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आज देश को ऐसे ही राजनेताओं की जरुरत है

किसी ने क्या खूब कहा है कि चाह नही, चिंता नही, मनुआ बेपरवाह. जिसको कुछ नही चाहिये वो शाहों का शाह। यह बात बिलकुल सटीक बैठती है आर्य समाज के प्रसिद्ध सन्यासी और राजस्थान के सीकर से बीजेपी सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती जी की के ऊपर। सीकर से बीजेपी सांसद सुमेधानंद सरस्वती देश के सबसे गरीब सांसदों में से एक हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, सुमेधानंद सरस्वती द्वारा घोषित संपत्ति 34,311 रुपये है. सरस्वती ने 2014 में सीकर से चुनाव लड़ा था, इस बार भी उन्हें सीकर से प्रत्याशी बनाया गया।

जहाँ आज एक ओर छोटे मोटे बाबाओं से लेकर बड़े-बड़े मठाधीशो के पास करोड़ों की सम्पत्ति है, राजनेताओं की तो गिनती ही क्या करें, हर पांच साल बाद उनकी सम्पत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी होती है। अफसर, हो या कारोबारी व धर्म के धंधेबाज चांदी काट रहे हो ऐसे में एक ईमानदार सन्यासी जो देश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा हो उसको देखकर किसका मन प्रफुल्लित नहीं होगा। कहा जाता है जनता के प्रतिनिधित्व का कोई सीधा अर्थशास्त्र नहीं होता कि गरीब जनता का प्रतिनिधि भी उसी आर्थिक हैसियत का हो लेकिन यह तय है कि जब जनता का प्रतिनिधि उन्हीं के बीच से निकलेगा तो वही उनका दुःख दर्द समझ सकता है।

यह सीकर की जनता का सौभाग्य कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्हें एक त्यागी ईमानदार ज्ञान और विवेक के धनी उम्मीदवार के रूप में स्वामी सुमेधानंद सरस्वती जी मिले। लेकिन दिक्कत तब आती है, जब हम देखते हैं कि विभिन्न दलों के जितने भी गंभीर किस्म के उम्मीदवार हैं, वे करोड़पति हैं यानी अनकही तौर पर पूर देश में ऐसी मान्यता है कि अगर आप करोड़पति नहीं हैं तो आपसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आप चुनाव लड़ने के लिए जरूरी संसाधन जुटा सकेंग।. लेकिन स्वामी सुमेधानंद जी ने इस सोच को झूठा साबित कर दिया।

वैसे देखा जाये तो राजनीति पैसे का खेल बन गई इस कारण उन लोगों को आगे बढ़ने से रोकती है, जिन पर लक्ष्मी की कृपा नहीं हुई। किन्तु इसके विपरीत स्वामी सुमेधानंद सरस्वती जी को सीकर की जनता का अपार स्नेह और समर्थन मिल रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी नेता को करीब 2.39 लाख वोटों से हराया था। उनकी ईमानदार और कर्मठ छवि को देखते हुए एक बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है और पहली लिस्ट में ही उनका नाम था। एक अखबार को दिए इन्टरव्यू में स्वामी सुमेधानंद सरस्वती जी कहते है मैं एक संन्यासी हूं। एक मेरी कोई प्रॉपर्टी, जायदाद, परिवार कुछ भी नहीं है। मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ । मेरी कोई उम्मीदें नहीं है और न ही मुझे पैसों की जरूरत है। मुझे सिर्फ एक जोड़ी कपड़ों और पर्याप्त भोजन की जरूरत है।

स्वामी सुमेधानंद सरस्वती सीकर के पिपरैली गांव में एक वैदिक आश्रम में मामूली जीवन बिताते हैं। वह सीकर में पिछले 23 सालों से रह रहे हैं। आर्य समाज के सदस्य सरस्वती ने बताया कि किस तरह उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और उनके समर्थक चुनाव से संबंधी दूसरे खर्चों में सहयोग देते हैं। जब उन्हें जरूरत होती है तो लोग एक जोड़ी कपड़े दे देते हैं। चुनाव भी मैं अपने समर्थक और पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद से लड़ते लोग जितना कर सकते हैं, स्वामी जी का सहयोग करते हैं।

हालाँकि देश की यदि 70 सालों की कहानी देखें तो हमारे नेता अमीर होते गए, लोग गरीब होते गए परन्तु यह एक पहला राजनेता है जिनकी सम्म्पति नहीं बढ़ी और अपने कार्यकाल में विकास भी खूब कराया। यदि हमारे देश के सभी जनप्रतिनिधि ऐसे हो फिर चाहे उनकी माली हालत जैसी भी हो। ऐसे सार सर्वस्व त्यागी जब लोकसभा में जुटेंगे तभी देश की गरीब आबादी की समृद्धि का रास्ता खुलेगा।

राजीव चौधरी

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