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धर्मिक दरबार: आशू महाराज के खोल से निकलकर आया आसिफ खान

भारत के बड़े  चैनलों पर हर रोज धार्मिक दरबार सजता है. बड़ी संख्या में भक्तों के बीच चमत्कारी शक्तियों का दावा करने वाले बाबा सिंहासन पर विराजमान होते हैं. ये लोग चैनलों के लिए वे देवता है जो सुबह-सुबह अपनी मनोहर वाणी से टीआरपी की वर्षा करते है. किन्तु जब यह बाबा किसी विवाद-शोषण आदि के मामलों में फंसते है तो चैनल वाले सबसे पहले इन्हें गुरु घंटाल बताकर उनका चीरहरण करने से नहीं चुकते.

दरअसल ये धर्म का वह भाग है जिसे भक्त आस्था और बाबा व्यापार से जोड़कर देखतें है. कहा जाता है कि समृद्धि के साथ-साथ अंधविश्वास भी बढ़ता है. लोग अपना रुतबा, अपनी दौलत कायम रखने के लालच में इसे बढ़ाते है. जो जितना समृद्ध, वह उतना ही अंधविश्वासी. इसी समृद्धि के पीछे भागता मध्यमवर्ग भला गरीब ही इस मामले में क्यों पीछे रहेगा. जीवन ही जरूरत का दूसरा रूप है, जरुरत सबकी अपनी-अपनी है अत: सिंहासन पर विराजमान बाबा लोगों की जरूरत पूरी होने के नुख्से जो बता रहे है.

हालाँकि भक्तों की आस्था से बाबाओं ने लगातार खेला है. हो सकता है इस समय भी देश के किस कोने में ना जाने कौन सा बाबा भक्तों से भक्ति का खेल रहा हो. हाल ही में बाबाओं के बीच से दिल्ली से ये जो नया बाबा पकड़ में आया है इसने तो कमाल ही कर दिया. धर्म और आस्था के नाम पर जो दुकान सजाई वो पूरी की पूरी दुकान ही ढोंग की निकली. पुलिस आशू महाराज को खोज रही थी और महाराज में से निकल आया आसिफ खान. जिसे भक्त आशु भाई गुरुजी मानकर चरणों में शीश नवा रहे थे. वो दरअसल आसिफ खान निकला है. वोटर लिस्ट पर आशु भाई गुरुजी की तस्वीर लगी है और उसके आगे लिखा हुआ है आसिफ खान पुत्र श्री इदहा ख़ान. वोटर लिस्ट में गलती की गुंजाइश इसलिए नजर नहीं आती क्योंकि ठीक उसी के नीचे उसी पते पर रहने वाले आसिफ खान के बेटे समर खान की भी तस्वीर लगी है.

साल 1990 से आशु भाई का भविष्य बताने का ये धंधा इतना फला फूला कि आज दिल्ली के कई इलाकों में बाबा की करोड़ों की प्रापर्टी है. जिसमें प्रीतम पुरा के तरुण एंकलेव में मकान, रोहिणी सेक्टर 7 में आश्रम और साउथ दिल्ली के हौजखास जैसे पॉश इलाके में ऑफिस है. और तो और बाबा ने अब अपना बिजनेस इतना बढा लिया था कि वो आयुर्वेदिक डॉक्टर भी गया था. जहां इलाज भी खुद करता था और दवाएं भी खुद बनाता था. यानि पूर्ण उपचार ग्रह-नक्षत्र से लेकर भूत-भविष्य तक और पेट की मरोड़ से लेकर असाध्य रोगों तक. मतलब एक बार मुर्गा फंस गया तो ये बाबा उसका खून तक चूस लिया करता था. लेकिन भक्त विश्वविख्यात ज्योतिषचार्य. हस्तरेखा विशेषज्ञ और काले जादू का महारथी मानकर कोटि कोटि नमन कर रहे थे.

ये उस देश का हाल है जहाँ हर तीसरे महीने कोई न कोई बाबा पकड़ में आता रहता है. लेकिन बेखोफ बाबा जनता दरबार सजाएं बैठे है. ऑनलाइन से लेकर अपनी गुफाओं तक में इनके व्यापार फल-फूल रहे है. लगातार धोखाधड़ी में पकडे गये बाबाओं की गिरफ्तारी से भक्त ये तो समझ रहे है कि कुछ बाबा लोग बुरे है. लेकिन इनके अपने बाबा अभी भी भगवान है यानि जो पकड़ा गया वो शैतान जो अभी पकड़ से बाहर है वो भगवान.

मंच सजते है, भक्त सवाल पूछते हैं और बाबा जवाब देते हैं. परेशानी भले ही सामान्य हो लेकिन बाबाओं के जवाब असामान्य होते. जब एक छात्रा पूछती है कि बाबा मैं कॉमर्स लूँ या साइंस. तब बाबा कहते हैं- पहले ये बताओ आखिरी बार समोसा कब खाया था. एक बेरोजगार और परेशान युवा पूछता है, बाबा नौकरी कब मिलेगी? बाबा कहते हैं क्या कभी कुत्ते को डंडे से मारा है.? यानि सवाल और सुझाव का कोई तुक नहीं होता.

किन्तु स्कूल के विषय पूछती छात्रा, नौकरी के लिए तरसता युवा या फिर बेटी की शादी न कर पाने में असमर्थ कोई गरीब बाप इन बाबाओं का लक्ष्य नहीं है. इनका लक्ष्य हैं मध्यमवर्ग और बड़े-बड़े अभिनेता और व्यापारिक घराने या फिर राजनेता जो इन बाबाओं के प्रति लोगों की श्रद्धा देखकर इनकी शरण में आ जाते है. बाबा तलाश में रहते है, एक बार किसी बड़े नेता, अभिनेता या व्यापारिक घराने से जुड़े व्यक्ति के साथ उनकी फोटो छप जाये तो इनके भक्त निहाल हो जाते कि देखों बाबा त्रिलोकी हो गये अब हम अकेले भक्त नही हमारे साथ नेता-अभिनेता भी शामिल है. बाबाओं के होटल हैं, बंगले हैं, बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ हैं. भक्त दावा करते है कि हर दिन लाखों-करोड़ों का चढ़ावा आ रहा हैं. 21वीं सदी का भारत कौन कहता है भारत में पैसे की कमी है..?

बस यही भक्ति का वो बाजार है जो आस्था के बल देश में बाबा और उनकी सम्पत्ति को बढाकर उन्हें सिंहासन प्रदान कर रहा है. जिसके लिए गरीब से गरीब और धनी से धनी बाबा के लिए अपनी संपत्ति कुर्बान कर देना चाहता है. हालाँकि बाबाओं को लेकर भारतीय जनता का प्रेम नया नहीं है. कभी किसी बाबा की धूम रहती है तो कभी किसी बाबा की. कभी आसाराम बापू और गुरमीत राम रहीम, भी भक्ति के बाजार के बड़े प्रोडक्ट रहे थे. इसके बाद शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज से भी भक्तो ने कई वर्षों तक शनि उतरवाया, फिर बाबा वीरेंद्र दीक्षित, भीमानन्द और पता नही कितने बाबा अपने बुरे कुकर्मो की वजह से जेल में बंद है. तो बाबा आशु उर्फ़ आसिफ खान का यौन-शोषण में पकड़ा जाना कोई बड़ी बात नहीं है. बड़ी बात बस ये है कि अन्य पन्थो के लोग समझ चुके है कि हिन्दुओं का अन्धविश्वास किसी को भी मालामाल कर सकता है.?..राजीव चौधरी

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