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महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का 130वां निर्वाणोत्सव सम्पन्न

 

दिल्ली  की समस्त आर्यसमाजों एवं आर्य संस्थाओं की ओर से आर्य केन्द्रीय सभा दिल्ली राज्य  के तत्वाधान  में आर्यसमाज के संस्थापक, युगप्रवर्तक , समाज सुधारक  महर्षि दयानन्द जी का 130 वां निर्वाणदिवस समारोह दिल्ली के एतिहासिक रामलीला मैदान में दीपावली के पावन पर्व पर दिनांक 3 नवम्बर 2013 को बड़ी धूम-धाम  के साथ मनाया गया यह समारोह  प्रातः 8 बजे से प्रारम्भ हुआ जिसमें श्रीमती प्रियंका एवं श्री कपिल बंसल, श्रीमती  ऋचा  एवं श्री राकेश भार्गव, श्रीमती वैशाली एवं श्री राजीव तलवार, श्रीमती उषा एवं श्री हरीश कालरा ने यजमान के रूप में भाग लिया। यज्ञ की सम्पूर्ण व्यवस्था आर्य केन्द्रीय सभा के संरक्षक व यज्ञप्रेमी श्री मदनमोहन सलूजा जी ने की। यज्ञ के उपरान्त प्रातः 9 बजे ओउम  ध्वज का आरोहण प्रसिद्ध आर्यसमाज सेवी श्री अश्विनी आर्य जी के कर कमलों से किया गया ध्वाजारोहण की व्यवस्था आर्यवीर दल दिल्ली प्रदेश के संचालक श्री जगवीर आर्य जी ने आर्यवीरों के सहयोग से की। सार्वजनिक समारोह प्रातः 9:30 बजे प्रारम्भ हुई, जिसकी अध्यक्षता आर्य केन्द्रीय सभा दिल्ली के प्रधान  एवं प्रसिद्ध समाज सेवी महाशय धर्मपाल जी ने की। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि महर्षि दयानन्द शांति के अग्रदूत थे। उन्होंने विचारों का ऐसे बीज रोपित किए जो अत्यधिक तेजी के साथ विकसित हुए और आज उनका प्रभाव चहुं दिशाओं में दृस्टिगत  होता है। कार्यक्रम  के प्रारम्भ में आर्य कन्या गुरुकुल रानी बाग की छात्राओं द्वारा सुमधुर  भजन प्रस्तुत किए गए साथ ही दिल्ली आर्य प्रतिनिधि  सभा के एम.डी.एस. वेद प्रचार वाहन पर सेवारत भजनोदेशक श्री संदीप आर्य के भजनों ने शमां बांधा। मुख्य अतिथि के रूप में एमिटी ग्रुप के निदेशक श्री आनन्द चैहान जी ने उपस्थित आर्यजनों को सम्बोधित  करते हुए आज के दौर में आर्य समाज एवं महर्षि दयानन्द जी की विचारधारा  को जीवन में उतारने का का आह्वान किया। सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की संचालिका श्रीमती मृदुला चैहान ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के जीवन से प्रेरणा लेकर सच्चे आर्य बनने के लिये एवं सभी को वैदिक धर्म के पथ पर चलने के लिये ऋषि से प्रेरणा लेनी चाहिए। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित परोपकारिणी सभा अजमेर के कार्यकारी प्रधान डॉ . धर्मवीर जी ने ओजस्वी वक्तव्य दिया। उन्होंने आर्यजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज संस्कारों एवं वैदिक संस्कृति की रक्षा परमावश्यक है अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब हमारो देश पूर्ण रूप से पूर्ण रूप से पाश्चात्य संस्कृति में डूब जाएगा। उन्होंने  कहा कि संस्कृत के विनाश से भारतीय संस्कृति खतरे में है। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि आर्यसमाज का बुद्धिजीवी वर्ग इस दिशा में आगे आकर कार्य करे। दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान  ब्र. राजसिंह आर्य ने कहा कि दिल्ली में शीघ्र ही गुरु विरजानन्द संस्कृति शिक्षण केन्द्र की स्थापना की जाएगी । विशिष्ट अतिथि के रुप में प्रसिद्ध समाज सेवी श्री अनिल तलवार जी ने भाग लिया। इस समारोह में प्रसिद्ध आर्य संन्यासी श्री स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती एवं आर्य केन्द्रीय सभा के संरक्षक तथा आर्य नेता श्री रामनाथ सहगल का सान्निध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर आचार्य धनञ्जय  शास्त्रीजी को ‘‘स्वामी विद्यानन्द सरस्वती वैदिक विद्वान पुरस्कार’’ श्री सुरेन्द्र चौधरी  जी को, ‘‘ डा. मुमुक्षु आर्य पं. गुरुदत्त  विद्यार्थी स्मृति पुरस्कार एवं श्री चन्द्रमोहन आर्यजी को अमर शहीद  मेजर डॉ . अश्विनी कण्व स्मृति पुरस्कार’’ से सम्मानित किया गया। समारोह में दिल्ली के समस्त आर्य समाजो  से बड़ी संख्या में आर्य नर-नारियों,स्कूली एवं गुरुकुलीय बच्चों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा , आर्य केन्द्रीय सभा, आर्य वीर दल, आर्य वीरांगना दली सभी वेद प्रचार मण्डलों, आर्यसमाजों, द्वारा संचालित विद्यालयों, गुरुकलों एवं सभी आर्य समाजो  के आधिकारियों  ने सोल्लास भाग लिया।

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