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गाँधी और कस्तूरबा के बीच सरला कौन थी..?

कभी आपने महात्मा गांधी की तस्वीरों को गौर से देखा है ज्यादातर तस्वीरों में गांधी के करीब काफी लोगों की भीड़ दिखाई देती है. इस भीड़ में कुछ नाम ऐसे लोगों के रहे हैं  जिन्हें हम सब जानते है. मसलन नेहरू जी, सरदार पटेल जी या कस्तूरबा गांधी हो या जिन्ना. बेशक गांधी के क़रीब अनेकों लोगों की भीड़ रही लेकिन इसी भीड़ में कुछ नाम ऐसे भी रहे, जिनके बारे में शायद कम ही लोग जानते हों.

इन बहुत सारे नामों में एक नाम था सरला देवी चौधरानी, उच्च शिक्षित बेहद सौम्य सी नजर आने वाली सरला देवी प्रसिद्ध कवि रविंद्रनाथ टैगोर जी की भतीजी थीं. बहुत कम लोगों को पता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गीत वंदे मातरम  की पहली दो पंक्तियों की धुन रविन्द्रनाथ टैगौर ने बनाई थी और शेष संगीत उनकी भतीजी सरला देवी चौधरानी ने ना सिर्फ तैयार किया था बल्कि इसे गाया भी था.

इस गीत को गाकर ही सरला देवी ने भारतीय राजनीति में प्रवेश किया था और 24 अक्टूबर 1901 को कलकत्ता में काँग्रेस की राष्ट्रीय प्रदर्शनी में विभिन्न प्रांतों से आई लड़कियों के साथ उठो ओ भारती लक्ष्मी समूह गान का नेतृत्व भी किया था. गाँधी जी सरला देवी के गाये गीत इतने खुश हुए कि कुछ दिन बाद जब वह लाहौर पहुंचे तो सरला के घर पर ही रुके. उन दिनों सरला देवी के पति रामभुज दत्त चौधरी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हुए जेल में थे तो दोनों एक-दूजे के काफी क़रीब आ गये थे.

इस करीबी को समझने का एक अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि गांधी जी सरला को अपनी आध्यात्मिक पत्नी तक बताने लगे थे. बाद के दिनों में गांधी ने ये भी माना कि इस रिश्ते की वजह से सरला की शादी टूटते-टूटते बची. हालाँकि गांधी जी और सरला ने खादी के प्रचार के लिए भारत का दौरा किया. दोनों के रिश्ते की ख़बर गांधी के करीबियों को भी रही. ज्यादा शोर जब मचने लगा तो गांधी ने जल्द उनसे दूरी बना ली.

असल में गाँधी जी के जीवन के अनेकों किस्सों से भरी एक पुस्तक गांधी नेकेड एंबिशन पिछले दिनों प्रकाशित हुई थी इस पुस्तक को ब्रिटेन के इतिहासकार जैड एड्मस शेड्स ने यह बताते हुए जारी किया कि यह पुस्तक महात्मा गांधी के निजी जीवन पर लिखी गयी किताब है किताब में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निजी जीवन के बारे में काफी कुछ लिखा गया है. इसमें ऐसी बातें भी है जिन पर विवाद हो सकता है. लेकिन जैड एडम्स शेड्स का दावा है कि उन्होंने बापू के सैकड़ों ख़तों की छानबीन के बाद इस किताब को लिखा है.

किताब में कहा गया है कि बुढ़ापे के दिनों में बापू कई जवान महिलाओं के साथ नहाते थे, निर्वस्त्र होकर मालिश करवाते थे. लेखक का यह भी दावा है कि वह अपनी शिष्यायों के साथ सोते थे. हालाँकि ऐसे सबूत नहीं मिले है, जिनके आधार पर यह कहा जाए कि उन महिलाओं के साथ गांधीजी के निजी संबंध थे.

लेखक का दावा है कि गांधी जी के इस व्यवहार को जवाहरलाल नेहरू असामान्य मानते थे और इसी कारण उन से दिन पर दिन दूरी बना बना रहे थे बहुत से लोगों का कहना है कि गाँधी के मन में कस्तूरबा के प्रति कोई लगाव नहीं था. इसका एक कारण यह था कि वे तीन बच्चों की ‍अशिक्षित मां थीं. इसी के चलते जब गाँधी दक्षिण अफ्रीका में पहुंचे तो अपने पेशे के कारण वे कई शिक्षित और शालीन महिलाओं के सम्पर्क में आए. उन्हें इन महिलाओं का साथ अच्छा लगने लगा और वे इससे एक बौद्धिक आनंद भी लेते थे. यह आनंद उन्हें कस्तूरबा से नहीं मिलता था.

इस दौरान कम से कम एक दर्जन महिलाएं उनके निकट सम्पर्क में आईं और इनमें से छह महिलाएं ऐसी थीं जिनकी जीवनशैली पश्चिमी सभ्यता के करीब थी. इन महिलाओं में ग्राहम पोलक, ‍निल्ला क्रैम कुक, मैडलीन स्लेड (जिन्हें मीराबेन के नाम से जाना जाता है), मारग्रेट स्पीगल, सोंजा स्केलेशिन और ईस्टर फी‍यरिंग.

जो भारतीय महिलाएं उनके करीब आईं उनमें श्रीमती प्रभावती देवी (जयप्रकाश नारायण की पत्नी), कंचन शाह, प्रेमा बेन कंटक, सुशीला नैयर, उनके पोते जयसुख लाल गांधी की पत्नी, मनु गांधी, आभा गांधी और सरलादेवी चौधरानी. इसी सरला देवी चौधारनी के गाँधी जी के दो साल तक संबंध रहे और गांधीजी ने खुद माना कि सरलादेवी के साथ उनके संबंध कामवासना के करीब थे.

इस बात को खुद गांधी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपनी कामवासना की विकृति का प्रयोग बहुत सारी महिलाओं के साथ किया जिनमें से एक उनके पोते कनु रामदास गांधी की सोलह वर्षीय पत्नी आभा भी थी.

गाँधी जी इस विकृति को छिपाने के लिए अजीब बहाने भी बनाया करते है वे उस समय कहा करते थे कि नग्न मनु के साथ उन्हें नग्न सोने से उन्हें बहुत लाभ हुआ है. इससे उन्हें देश विभाजन और हिंदू मुस्लिम एकता जैसी गंभीर समस्याओं पर विचार करने में मदद मिली. वे कहा करते थे कि वे मनु के साथ उसकी मां की तरह से सोते हैं और आभा और मनु उनके चलने का सहारा हैं.

स्वाभाविक है कि इन बातों से गांधी की तीखी आलोचना होती थी और ब्रह्मचर्य के नाम पर वासना की विकृति से उनके करीबी सहयोगी भी नाराज हो गए थे. एक दिन उनके स्टेनोग्राफर आरपी परशुराम ने उन्हें नग्न मनु के साथ लेटे देखा तो अपना इस्तीफा दे दिया और वे चले गए. ऐसे ही निर्मल कुमार बसु गांधी के बड़े करीबी सहयोगी थे और गांधी के नोआखाली दौरे पर वे उनके साथ थे. सत्रह दिसंबर की रात को एक ऐसी घटना घटी जिसने निर्मल कुमार को गांधी का कट्टउर आलोचक बना दिया. निर्मल कुमार ने हमेशा के लिए गांधी को छोड़ दिया और एक पत्र लिखकर गांधी के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि वे अपनी युवा महिला सहयोगियों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं. उनका कहना था कि यह बड़े शर्म की बात है कि ऐसे विकृत व्यक्ति के लिए हम महात्मा शब्द का उपयोग कर रहे हैं.

Rajeev choudhary 

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