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दोगले अब मानवता का पाठ पढ़ा रहे है?

वर्ष 1971 यूगांडा में ईदी अमीन ने राष्ट्रपति मिल्टन ओबोटे का तख़्ता पलट दिया था. फिर उन्होंने यूगांडा में अपनी तानाशाही का दौर शुरु किया और इसके बाद उन्होंने एशियाई मूल के हजारों लोगों को जो इस्लाम से भिन्न मत रखते थे जिनमे भारत का एक बहुत बड़ा हिन्दू समुदाय भी था देश से निकाल दिया, उनकी संपत्ति जब्त कर ली और अपने दोस्तों में बाँट दी जब विश्व समुदाय ने इस घटना को उठाया तो समस्त मुस्लिम देशों ने एक स्वर में कहा था कि इस्लाम के बीच सिर्फ इस्लाम को मानने वाले ही रह सकते है. आज वो सब और यह दोगले म्यांमार को मानवता का पाठ पढ़ा रहे है.

जिस समय भारत सरकार बांग्लादेश में रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों के आपरेशन इंसानियत चला रही हैं ठीक उसी समय रखाइन में म्यांमार की सेना को एक कब्रगाह मिली. जिसमें से 45 हिंदुओं के शव निकाले गए हैं. इस पूरे इलाके से करीब 1 हजार से ज्यादा हिंदुओं के गायब होने की ख़बर है. म्यांमार की सेना का भी आरोप है कि इन हिंदुओं की हत्या रोहिंग्या मुसलमानों ने की है. और इनकी हत्या में आतंकवादी संगठन अराकान का भी हाथ है. मरने वालों में बहुत से बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं. जो रोहिंग्या हिंदू. हमले के बाद भागने में कामयाब हुए, उन्हें शरणार्थी शिविरों में रखा गया है. रखाइन में बहुत से ऐसे इलाके हैं, जहां से हिंदुओं की पूरी आबादी को खत्म कर दिया गया है. इन इलाकों से हजारों की संख्या में हिंदुओं का पलायन जारी है, लेकिन दुनिया को सिर्फ रोहिंग्या मुसलमानों का दर्द दिखाया जा रहा है.

खबर से साफ होता है कि म्यांमार में रोहिंग्या आतंकियों ने सिर्फ बौद्धों को ही निशाना नहीं बनाया था, बल्कि उनके निशाने पर हिन्दू समुदाय के लोग भी थे. कुछ उसी मानसिकता के साथ की इस्लाम में अन्य मतो के लिए कोई जगह नहीं है. लेकिन दुखद बात यह कि एक ही इलाके में. इंसानों पर हो रहे अत्याचार की चिन्हित रिपोर्टिंग हो रही है और पूरे मुद्दे का धर्मिक विभाजन किया गया है. डेली मेल की इस रिपोर्ट  के अनुसार तो तो हिन्दुओं पर म्यांमार के रखाइन में शुरू हुए अत्याचार का यह सिलसिला थमा नहीं है, बल्कि दुर्भाग्य उनका पीछा करते हुए बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर तक पहुंच गया है. शरणार्थी शिविर में पहुंची हिन्दू महिलाओं का दावा है कि उनके सिन्दूर पोंछ दिए गए, चूड़ियां तोड़ दी गई. यहां तक कि उनका धर्म परिवर्तन कर दिया गया और मुसलमानों से शादी कर दी गई. इस सबके बावजूद भी पिछले दिनों जन्तर-मंतर पर मानवता की दुहाई देने वाले धर्मनिरपेक्ष लोग और रोहिंग्या मुस्लिमों का दर्द देखने वाले चश्मे इस खबर पर कोई भी अपनी नजर उठाने को तैयार नहीं है.

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में स्थित शरणार्थी शिविर में शरण लेने वाली पूजा का इसी महीने धर्म परिवर्तन कर राबिया बना दिया गया. अगस्त के आखिरी सप्ताह में म्यांमार में भड़की हिंसा में पूजा के पति की मौत हो गई थी. उसके पति व परिजनों को म्यांमार की सेना ने नहीं, बल्कि कुछ नकाबपोशों ने धर्म के नाम पर हत्या कर दी. हत्यारों ने उसे जिन्दा छोड़ दिया और बंदी लिया.

भारत के न्यूज चैनलों पर बैठे रोहिंग्या मुसलमान खुद को असहाय बता रहे हैं. जबकि उनकी बर्बरता कम नहीं हो रही है. बौद्धों के अलावा वह हिन्दुओं को भी निशाने पर ले रहे हैं. आतंकी संगठनो से रोहिंग्या मुस्लिमों की मिलीभगत साफ साफ नजर आ रही है तो भारत के ये स्वघोषित उदारवादी लोग और कुपढ़ धर्मनिरपेक्ष लोग इन्हें भारत में बसाने के पक्ष में क्यों लगे हुए हैं? जो मरते-मरते भी अपने मजहब के विस्तार के लिए अमानवीय तरीके अपना रहे हो. जिस समुदाय के बारे में इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में भी आतंकी संगठनों से मिले होने की बात कही गयी हो उसको भारत में शरण देने के लिए भारत के मीडिया और अन्य संस्थानों में बैठे लोग मुखर हो कर सामने आ रहें हैं ? जिस कश्मीर में आज रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने के लिए बड़े बड़े लेख लिखे जा रहें हैं, दलीले दी जा रही है,  याचिका डाली जा रही हैं,  उस कश्मीर में कभी कश्मीरी पंडितों को बसाने के लिए क्यों सभी चुप हैं ? जम्मू कश्मीर में जो दोमुँहे लोग रोहिंग्या की पैरवी कर रहें हैं वो जम्मू कश्मीर में 35। से हो रहे शोषण पर चुप क्यों हैं ? ये सिर्फ और सिर्फ इनका दोहरा चरित्र है. भारत को अस्थिर करने में ये सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं. वैचारिक विरोध की आड़ में, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में, संविधान की आड़ में ये लोग सिर्फ अपना एजेंडा चलाने में लगे रहते हैं.

जबरदस्ती मुसलमान बनाई गई रिका उर्फ सादिया किस तरह रोते हुए बता रही थी  ” उन्होंने हमारे घरों में घुसपैठ की और हमले किए. हमारे आदमियों के मोबाइल फोन छीन लिए गए और बांधकर बुरी तरह पीटा गया मेरे पति लोहार थे. मेरे सारे गहने ले लिए मुझे पीटने लगे सभी हिन्दुओं को पकड़कर एक पहाड़ी पर ले जाया गया और लाइन में लगाकर मार डाला गया. सिर्फ 8 महिलाओं को जिंदा रखा गया उन्होंने कहा तुम अब हमारे साथ रहोगी हमसे शादी हमारे पास उनके सामने सरेंडर करने के अलावा कोई उपाय नहीं था. धर्म परिवर्तन की बात मानने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं बचा थी. वहीं से हमें बांग्लादेश के एक कैंप में ले जाया गया और धर्म परिवर्तन के नाम पर मीट खिलाया गया. अब सोचकर देखिये इन लोगों की मजहबी कट्टर मानसिकता क्या यह लोग भारत में बसाने लायक है? विराथू जैसे बोद्ध भिक्षु जो कभी हिंसा मन में नहीं लाते शायद इनके इन्ही कृत्यों की वजह से समझ गये होंगे कि अपना भिक्षु धर्म तभी निभा पाएंगे जब उनका धर्म रहेगा, वह रहेंगे, म्यांमार रहेगा और उनकी संस्कृति रहेगी. …राजीव चौधरी

 

 

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